२३ मार्च १९३१, शहीद-ए-आज़म भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव की शहादत का दिन! हमसे यह सवाल कर रहा है कि उनके सपनों का भारत कब बनेगा. भगत सिंह ने फांसी चढ़ाने से पूर्व पंजाब के गवर्नर को लिखे गए पत्र में कहा था " यहाँ युद्ध की स्थिति विद्यमान है और तब तक विद्यमान रहेगी जब तक भारत के पसीना बहाने वाले जनसमूह तथा प्राकृतिक वैभव का मुट्ठी भर शोषकों द्वारा शोषण होता रहेगा। …………………………………य़ह युद्ध चलता रहेगा जब तक समाजवादी जनतंत्र की स्थापना नहीं हो जाती" इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि "वर्तमान ढांचा जो दूसरों की मजबूरियों केेेे बूते पर खड़ा है एक ज्वालामुखी के मुहाने पर है। ..................सभ्यता के इस महान ढांचे को यदि समय रहते न संभाला गया तो यह ढेर हो जाएगा ! इसके लिए जड़ से परिवर्तन की जरूरत है ! इस बात को जो लोग समझते या महसूस करते हैं उनका यह फ़र्ज़ बनाता है कि समाजवाद पर आधारित समाज का पुनर्निर्माण करें!………………क्रान्ति से हमारा तात्पर्य है शोषण व अन्याय पर टिकी वर्तमान आर्थिक सामाजिक राजनीतिक ढांचे का आमूल-चूल परिवर्तन!"
आइये उनके इन विचारों के आलोक में हम तय करें कि क्या वाकई इन ६८ वर्षों की तथाकथित आज़ादी का भारत वही है जिसके लिए ना जाने कितने क्रांतिकारियों ने अपनी जवानी को फांसी चढ़ने और क्रूर यातनाओं के हवाले कर दिया था !
उन क्रांतिकारियों के उन्हीं सपनों को पूरा करने को संकल्पबद्ध भारत की क्रान्तिकारी समाजवादी पार्टी ( मार्क्सवादी - लेनिनवादी) का सन्देश --------------
आइये उनके इन विचारों के आलोक में हम तय करें कि क्या वाकई इन ६८ वर्षों की तथाकथित आज़ादी का भारत वही है जिसके लिए ना जाने कितने क्रांतिकारियों ने अपनी जवानी को फांसी चढ़ने और क्रूर यातनाओं के हवाले कर दिया था !
उन क्रांतिकारियों के उन्हीं सपनों को पूरा करने को संकल्पबद्ध भारत की क्रान्तिकारी समाजवादी पार्टी ( मार्क्सवादी - लेनिनवादी) का सन्देश --------------


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